क्या सिर्फ अच्छा और ईमानदार होना ही काफी है? – सच्चे रब की पहचान आजकल अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या केवल एक अच्छा और ईमानदार इंसान होना ही काफी है? लेकिन जब हम अपने जीवन और ईमान की गहराइयों को समझते हैं, तो हमें एहसास होता है कि सच्चाई के रास्ते पर चलकर ही हम सही मायने में इंसान बनते हैं और अपने रब को पहचान पाते हैं। सच्चाई से ईमान का सफर जब कोई इंसान सच्चाई के रास्ते पर चलता है, तो उसका ईमान मज़बूत होता है। ईमान पर चलने से ही दीन मुकम्मल होता है। यह वही राह है जिस पर चलकर हज़रत अली (र.अ.), हज़रत उमर (र.अ.), हज़रत अबू बकर (र.अ.), और हज़रत उस्मान (र.अ.) जैसी महान हस्तियां इस दुनिया में मिसाल बनीं। ये वे नेक लोग हैं जिन्हें उनके कर्मों से जीते-जी जन्नत का वी वीआईपी (VVIP) कंफर्म टिकट मिला। इस बात को समझना ज़रूरी है कि केवल एक अच्छा इंसान होना ही काफी नहीं है, बल्कि उस सच्चे खुदा को मानना भी ज़रूरी है जिसने हमें पैदा किया, हमें खूबसूरत बनाया, और एक मज़बूत शरीर दिया। हमारे रब की मेहरबानियां वह खुदा ही है जो हमारे बुरे वक्त में हमारे काम आता है। अगर हम उस सच्चे खुदा को छोड़कर किसी और ...
2029 का सबसे बड़ा सवाल: क्या भारत बदलेगा अपनी तकदीर? भारत की राजनीति आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ भविष्य की तस्वीर धुंधली नज़र आ रही है। पिछले 15 सालों से एक ही सरकार का शासन है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या देश की बुनियाद मज़बूत हुई है या कमज़ोर? जब हम 2029 के लोकसभा चुनाव की बात करते हैं, तो यह सिर्फ एक अगला इलेक्शन नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की अग्नि-परीक्षा होने वाली है। 1. करोड़पतियों का पलायन: एक गहरी चिंता पिछले कुछ वर्षों में एक हैरान कर देने वाला रुझान देखने को मिला है—भारत के बड़े बिजनेसमैन और करोड़पति लोग देश छोड़कर विदेशों में बस रहे हैं। सवाल यह है: अगर देश में सब कुछ सही है और विकास हो रहा है, तो देश का 'टैलेंट' और 'पैसा' बाहर क्यों जा रहा है? अर्थव्यवस्था की स्थिति: बेरोज़गारी और बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, जबकि बड़े निवेशक सुरक्षा और बेहतर अवसरों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। 2. हिंदू-मुस्लिम राजनीति बनाम असली मुद्दे आज भी हमारे न्यूज़ चैनलों और राजनीतिक भाषणों में विकास से ज़्यादा धर्म पर चर्चा होती है। 15 साल बीत जाने के बाद भी ...